राष्ट्र एवं समाज को समर्पित संस्था ‘सद्प्रयास’ का उदेश्य भी और वादा भी रहा है कि हम सदा देश और समाज के हाशिये पर रखे गए लोगों के हित में प्रयासरत रहेंगे। जो सत्य भी है और शाश्वत भी, जिसके लिए हमने कीमतें भी चुकाई हैं, भविष्य में भी तैयार रहेंगे। क्योंकि समर्थों के साथ तो सब कुछ होता है, सब खड़े होते हैं परन्तु असमर्थों, लाचारों का साथ तो उनका साया भी नहीं देता। हर जगह, हर पल उन्हें तिल-2 गलना होता है। हाशिये का आदमी अपनी दैहिक मृत्यु तक कई-2 बार, हजारों-लाखों बार मरता है या मरना पड़ता है या मारा जाता है। उसका कोई अपना अस्तित्व नहीं होता, उसे किसी की परछाई बन कर जीना होता है। वह दूसरों के लिए अपने वजूद को मिटाता चला जाता है। गरीब कहीं देश की सीमा पर, कभी कारखाने में, कहीं खेत मेँ, कभी कहीं राजपथ, कोई नहर, किसी भवन को बनाते हुए जान गंवाता है। लेकिन वह अपने बलिदान को ढोल पीट-2 कर प्रचारित नहीं करता। उसकी कुर्बानियों को भुना कर अपने महल बनाने संदिग्ध चरित्र के लोग तो अन्य ही होते हैं।

जैसे कि हमने वादा किया था कि ‘सद्प्रयास’ देश के उन हजारों देश भक्त वीर सपूतों के बारे में भारत के आम आदमी को संक्षिप्त जानकारी देगा, अपना वादा निभाते हुए ‘देश के गौरव’ स्तम्भ की दूसरी कड़ी अत्यंत हर्ष एवं गौरव सहित समर्पित एवं प्रस्तुत है।

(साभार, हू’ज हू, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार)।

देश के गौरव शीर्षक के नाम से शुरू किए गये इस स्तम्भ की दूसरी कड़ी प्रस्तुत है:

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देश के गौरव-I यहां पढ़ें

5. अब्दुल अहद: सुपुत्र श्री अब्दुल सलाम गांव हंडवारा, ज़िला बारामूला, जम्मू-कश्मीर। पेशा नाई, जम्मू- कश्मीर के लिए चले राजनैतिक आंदोलन में हिस्सा लेते हुए फरबरी 1932 में निरंकुश शासन के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान राज्य की सेना की गोलियों से शहीद हुए।

6. अब्दुल अज़ीज़: सुपुत्र श्री अब्दुल क्यूम, गांव बिरोली, ज़िला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश। भारतीय सेना (ब्रिटिश) के आठवीं परिवहन कंपनी में कुली। 1942 में आज़ाद हिन्द फौज में सिपाही भर्ती हुए और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लड़ते हुए शहीद हुए।

7. अब्दुल गनी: मलाया में आज़ाद हिन्द सेना में शामिल हुए और यूनिट 451 में सेवारत। वर्मा में मार्च 1945 में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लड़ाई में वीरगति प्राप्त की।

8. अब्दुल कादिर, मोहम्मद: पिता का नाम वावाकुंजू, के घर 25 मई 1917 को पैदा हुए। शिक्षा मेट्रिक, गांव वक्कम, ज़िला त्रिवेन्द्रम, केरल। त्रावनकोर राज्य में उत्तरदायी सरकार की स्थापना के लिए लोकप्रिय आंदोलन में भाग लिया (1938)। 1942 में मलाया में आज़ाद हिन्द फौज में भर्ती हुए और खुफिया विभाग में काम किया। 1942 में कालीकट तट पर गिरफ्तार किए गए और 1943 में फांसी पर चढ़ा दिये गए।

9. अब्दुल रहमान: सुपुत्र श्री खुदाबख्श; जम्मू शहर, जम्मू कश्मीर। 1932 में सस्ते भोजन की मांग करते हुए ‘रोटी आंदोलन’ में भाग लिया। 1932 में जम्मू में निरंकुश शासन के विरुद्ध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों पर चलाई गई गोलियों में शहीद हुए।

10. अब्दुल रशीद खां: भारतीय सेना के युद्ध सामग्री कॉर्प्स में हवलदार। आज़ाद हिन्द फौज के द्वितीय गुरिल्ला रेजीमेंट में अफसर भर्ती हुए और युद्ध में शहीद हुए।

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11. अब्दुल रज्जाक: सुपुत्र श्री मुंशी खां, गांव सांवली, ज़िला रोहतक, हरियाणा। ब्रिटिश भारतीय सेना के जाट रेजीमेंट में सिपाही। 1942 में आज़ाद हिन्द फौज के द्वितीय गुरिल्ला रेजीमेंट में सिपाही भर्ती हुए। ब्रिटिश सेना के विरुद्ध युद्ध में कलेवा (बर्मा) में शहीद हुए। .………क्रमश:………